कौन थे कश्मीरी पंडित , क्यों छोड़ा कश्मीर | Kashmiri Pandits Exodus History, Movie kashmir files

कौन थे कश्मीरी पंडित, क्यों छोड़ा कश्मीर, मूवी, नरसंहार, हत्या, कांड (Kashmiri Pandits Exodus History in Hindi) (Story, Movie, 1990, Issue)

यूँ तो कश्मीर हमेशा किसी न किसी कारण से सुर्ख़ियों में रहता है, चाहे आतंकवाद का मामला हो, या कुछ सालों पहले भारतीय आर्मी पर हुवे हमले या फिर article 370 का हटाया जाना, लेकिनं इस बार कश्मीर , कश्मीरी पंडितों पर हुवे अत्याचार पर बनी फिल्म कश्मीर फाइल्स (film Kashmir Files), के कारण चर्चा में है | इस film ने जिस तरह कश्मीरी पंडितों पे हुवे अत्याचार का खुलासा किया है उसे देखकर आपके रोंगटे खरे हो जायेंगे | लेकिन ये कश्मीरी पंडित कौन थे, इनका क्या इतिहास था, अभी वे कहा है , इस पोस्ट में हम इन्ही जानकारियों के बारे में आप को बतायंगे |

कश्मीरी पंडितों और कश्मीर का इतिहास (Kashmiri Pandits History in hindi)

अनुसूची (Table of Contents)

kasmiri pandit
kasmiri pandit

आजादी से पहले कश्मीर एक बेहद ही खुबसूरत जगह थी इसे धरती का स्वर्ग कहा जाता था | यह जगह बहुत ही शांतिपूर्ण हुवा करती थी, यहाँ के एक बड़ी आबादी कश्मीरी पंडितों की हुवा करती थी | इतिहास में जाए तो यहाँ शुरू से ही कई विदेशी आक्रमण कारियों ने हमले किये, और कश्मीर के इतिहास और संस्कृति को मिटाने का प्रयास किया | बाद के कई मुस्लिम राजाओं ने वहां शासन भी किया |

जिस तरह अलग – अलग जातियों में अलग – अलग श्रेणी हुवा करती है उसी प्रकार कश्मीरी पंडितों की भी अलग-अलग श्रेणियां थी और इन श्रेणियों के आधार पर इन पंडितों के अलग-अलग रीति, रिवाज और परंपराएं थी |

बनमासी कश्मीरी पंडित (Banmasi)

कश्मीरी पंडितों की दो श्रेणियां थी, पहली बनमासी (Banmasi) |  इस श्रेणी में उन पंडित को गिना जाता था जो मुस्लिम राजाओं के शासन के दौरान घाटी को छोड़कर चले गए थे और बाद में कश्मीर वापस आकर बस गए |

मलमासी कश्मीरी पंडित (Malmasi)

वही दूसरी श्रेणी के पंडित को मलमासी (Malmasi) कहा जाता था. इस श्रेणी में उन पंडितों को रखा गया जिन्होंने सभी तरह के अत्याचार सहे लेकिन अपनी जमीन कश्मीर को नहीं छोड़ा |

इसके अलावे जो पंडित बाहर से आके बस गए और घाटी में व्यवसाय करना शुरू कर दिया , वो बुहिर पंडित कहलाने लगे | लेकिनं 1990 के दशक में जैसे ही आतंकवाद ने कश्मीर में अपने पैर पसारे इन पंडितों का नामों निशान इस जगह से खत्म होता गया और जन्नत कहा जाने वाला कश्मीर आतंकवाद का अड्डा बन गया |

कश्मीर पर किसका हक़ था ?

 सभी आतंकी मुस्लिम संगठन कश्मीर की केवल मुस्लिमों का मानते हैं वे यहाँ पर उन्हें दुसरे धर्म के लोगों की उपस्थिथि कबूल नहीं, वे कश्मीर पर सिर्फ अपना हक़ जताते हैं जिसके चलते यहाँ मुस्लिम को छोड़कर बाकी सभी धर्मों के लोगो का जीना दुस्वार कर दिया गया था |

कश्मीरी पंडित कश्मीर के मूल निवासी थे, जैसा की हमने पहले कहा कश्मीर में कई मुस्लिम राजाओं ने आक्रमण किया, वे यहाँ जबरन लोगो को मुस्लिम धर्म अपनाने को कहते थे, अगर वे इस्लाम धर्म नहीं अपनाते थे तो उन्हें मार दिया जाता था, इस डर से बहुत से हिन्दु मुस्लिम बन गए और बाद में धीरे- धीरे कश्मीर में मुस्लिम लोगों की तादाद भी बढ़ गयी |

आतंकवादी कश्मीरी पंडितों को उनका धर्म बदलने के लिए हमेशा से दबाव डालने थे,  वे चाहते थे कि कश्मीर में रहने वाले सभी पंडित मुस्लिम धर्म को अपना लें, और कश्मीर में एकक्षत्र मुल्स्लिमों का राज रहे , और बाद में वे पाकिस्तान में मिल जाएँ |

जिन कश्मीरी पंडितों ने आतंकवादियों की इस बात को मान लिया और अपना धर्म बदल लिया था, उन्हें शातिपूर्व यहां पर रहने दिया गया. लेकिन जिन पंडितों ने अपना धर्म नहीं बदला और इस घाटी को नहीं छोड़ने का फैसला किया था, उन्हें बहुत यातनाएं झेलनी पड़ी | जिस कारण  1990 के दसक में कश्मीरी पंडितों के एक बहुत बड़ी आबादी कश्मीर से पलायन कर गयी और देश के अलग – अलग शहरों में जाकर बस गयी |

आखिर क्या हुआ था 19 जनवरी 1990 की रात कश्मीरी पंडितों के साथ (Exodus of Kashmiri Pandits)

80 के दश्क में जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) और पाकिस्तान के समर्थक वाले कई जिहादी इस्लामिक ताकतों ने यहां की मुस्लिम जनता के बीच भारत के प्रति नफरत फैलाने का कार्य तेज कर दिया | साल 1988 में जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट ने भारत से कश्मीर को आजाद करवाने के लिए अलगाववादी विद्रोह शुरू कर दिए |

इसके कारण साल 1989 में भारतीय जनता पार्टी के एक नेता टिका लाल तपलू की सरे आम गोलिओ से भुनकर हत्या कर दी गई. टिका लाल वहां के जाने माने नेता थे |

इस हत्या ने कश्मीरी पंडितों के मन में खौफ पैदा कर दिया |

4 जनवरी, 1990 को कश्मीर के उर्दू अखबारों में आतंक संगठन हिज्ब-उल-मुजाहिदीन द्वारा एक विज्ञापन प्रकाशित किया गया था. इस विज्ञापन में हिज्ब-उल-मुजाहिदीन ने सभी पंडितों को, घाटी तुरंत छोड़ने के आदेश दिए थे |

 इस विज्ञापन में लिखा गया था कि, या तो कश्मीर को छोड़ दो या धर्म बदल लो, नहीं तो मरने के लिए तैयार हो जाओ. इस विज्ञापन को काफी समय तक अखबारों में प्रकाशित किया गया था, ताकि पंडितों के मन में खौफ बना रहे.

इस विज्ञापन के कुछ दिनों बाद इस आतंकी संगठन ने घाटी के कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया था और पंडितों को मारने लगे थे.

साल 1990 के जनवरी महीने में श्रीनगर में एम एल भान और बलदेव राज दत्ता नामक सरकारी कर्मचारियों की हत्या कर दी गई थी, कारण, ये दोनों कश्मीरी पंडित थे |

इन दोनों कर्मचारियों की हत्या के बाद से घाटी में तनाव और बढ़ गया और इनकी हत्या के चार दिन बाद यानी 19 तारीख को घाटी के हालात और खराब हो गए.

19 जनवरी 1990 की सर्द सुबह थी। कश्‍मीर की मस्जिदों से उस रोज अज़ान के साथ-साथ कुछ और नारे भी गूंजे। ‘यहां क्‍या चलेगा, निजाम-ए-मुस्तफा’, ‘कश्‍मीर में अगर रहना है, अल्‍लाहू अकबर कहना है’ और ‘असि गछि पाकिस्तान, बटव रोअस त बटनेव सान’ मतलब हमें पाकिस्‍तान चाहिए और हिंदू औरतें भी मगर अपने मर्दों के बिना। यह संदेश था कश्‍मीर में रहने वाले हिंदू पंडितों के लिए। ऐसी धमकियां उन्‍हें पिछले कुछ महीनों से मिल रही थीं।

वहीं इस दौरान यहां पर रहने वाले पंडित महिलाओं के साथ बलात्कार भी किए जाने लगे और छोटे-छोटे बच्चों को मारा भी जाने लगा, कई लड़कियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर, उनके शारीर को आरियों से काट कर दरिया में बहा दिया जाता था ताकि, इससे कश्मीरी पंडितों के मन में और ज्यादा खौफ पैदा किया जा सके|

अंत में  इन सब  घटनाओं के बाद 19 जनवरी 1990 की रात, भय, उत्पीड़न, प्रताड़ना से त्रस्त होकर कश्मीरी पंडितों का एक बड़ा समुदाय कश्मीर से पलायन  कर गया |

जनवरी के महीने के अंत तक कश्मीर में रहने वाले लाखों पंडितों ने घाटी को छोड़ दिया और देश के अलग अलग हिस्सों में चले गए. कुछ पंडित जम्मू में जाकर बस गए तो कुछ पंडितों ने इस राज्य को ही छोड़ दिया.

सरकार ने नहीं की कोई मदद ( No Government support)

जब कश्मीरी पंडितों के साथ ये अत्याचार हो रहे थे, तो उस वक्त केंद्र में वी. पी. सिंह की सरकार थी और राज्य में Omar Abdullah के पिता फारुख उबदूला की सरकार थी, उनके बेटे बाद में वहाँ के मुख्य्मंत्री बने ,. लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों में से किसी ने भी कश्मीरी पंडितों की किसी भी तरह से मदद नहीं की.

कश्मीरी पंडितो की जनसंख्या (Population of Kashmiri Pandits)

अगर आंकड़ों की बात की जाय तो  20वीं सदी की शुरुआत में कश्मीर में लगभग 10 लाख कश्‍मीरी पंडित थे। आज की तारीख में सिर्फ 4,000 ही बचें हैं। 1941 में कश्‍मीरी हिंदुओं का आबादी में हिस्‍सा 15% था। 1991 तक उनकी हिस्‍सेदारी सिर्फ 0.1% रह गई थी। जब किसी समुदाय की आबादी 10 लाख से घटकर 10 हजार से भी कम रह जाए तो उसे नरसंहार ही कहा जाएगा ।

कितने कश्मीरी पंडितों की गई जान

सरकार के आंकड़ों के अनुसार कश्मीर में साल 1990 में करीब 300 कश्मीरी पंडितों की हत्या की गई थी. लेकिन कश्मीरी पड़ितों पर जो किताबें लिखी गई हैं, उन किताबों के मुताबिक हजारों की संख्या में कश्मीरी पंडित मारे गए थे. औरतों के साथ बलात्कार किया गया था और उन्हें बुरी तरह से मारा गया था. मगर सरकार ने महज 300 पंडितों की मौत की पुष्टि की थी, जो कि गलत आकंड़ा था.

इस समय कश्मीर में पंडितों के हालात (Rehabilitation of Kashmiri Pandits)

इस वक्त कश्मीर में ना के समान कश्मीरी पंडितों बचे हुए हैं. लेकिन सरकार दोबारा से घाटी में इन्हें बसाने की कोशिश करने में लगी हुई है. साल 2008 में यूपीए सरकार ने इनको दोबारा से बसाने के लिए 1,168 करोड़ के पैकेज का ऐलान किया था. जिसके बाद करीब 1000 की संख्या में कश्मीरी पंडित वापस से घाटी में आकर बसे हैं |

आज भी घाटी में कश्‍मीरी पंडित सुरक्षित नहीं

पिछले 31 साल में कश्‍मीरी पंडितों को वापस घाटी में बसाने की कई कोशिशें हुईं, मगर नतीजा कुछ नहीं निकला ।

1992 के बाद हालात और खराब होते गए। हिंदुओं को भी इस बात का अहसास है कि घाटी अब पहले जैसी नहीं रही।

 5 अगस्‍त, 2019 को जब भारत सरकार ने आर्टिकल 370 हटाकार, जम्‍मू और कश्‍मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्‍म किया तो कश्‍मीरी पंडित बेहद खुश थे। मगर उनकी वापसी के अरमान अब भी अरमान ही हैं।

कश्‍मीरी हिंदू न 1990 में घाटी के भीतर सुरक्षित थे, न आज हैं। पिछले कुछ दिनों में आतंकवादियों ने हिंदूओं और सिखों को निशाना बनाया है।

गुरुवार सुबह श्रीनगर में एक सरकारी स्‍कूल के दो टीचर्स की हत्‍या कर दी गई। मंगलवार को आतंकियों ने एक स्‍ट्रीट हॉकर केा मार डाला था। उसी दिन श्रीनगर में एक कारोबारी, माखन लाल बिंद्रू को गोलियों से भून दिया गया।

Aarti Tikoo Remembers & Shares Story of Hindus Of Kashmir Valley

‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म 2022 (‘The Kashmir Files’ Film Story)

हालही में 11 मार्च के दिन विवेक अग्निहोत्री के द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ रिलीज़ हुई है, ये फिल्म अपनी रिलीज़ के पहले ही कई विवादों के चलते चर्चाओं में रही |

इस film की रिलीज़ को रोकने ने लिए कुछ मुस्लिम संगठनों ने कोर्ट में याचिका भी दायर की |

यह फिल्म सन 1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ हुवे, अत्याचार को दिखाता है | यह film कश्मीर से निकाले गए उन लाखों कश्मीरी पंडितों के दर्द को बायाँ करता है की किस हालात और परिस्थिति में उन्होंने धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर को छोड़ने का निर्णय लिया |

मुख्य कलाकार

इस फिल्म में मुख्य कलाकार के रूप में मिथुन चक्रवर्ती, अनुपम खैर, पल्लवी जोशी, दर्शन कुमार, चिन्मय मंडलेकर, पुनीत इस्सर एवं मृणाल कुलकर्णी इत्यादि हैं |

द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म रिव्यु – film में विवेक अग्निहोत्री में बेहतरीन निर्देशन किया है, film में सभी कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय किया है, खासतौर पर अनुपम खेर ने , क्योकि कहा जाता है अनुपम खेर भी एक कश्मीरी पंडित है इसलिए शायद उनसे बेहतर उनके दर्द को कौन जान सकता है | फिल्म आपको शुरू से अंत तक बाँध कर रखने में कामयाब हुवा है, film के अंत में दर्शन कुमार द्वारा दिया गया भाषण बेहतरीन है, इसके साथ ही अंत में दिखाया गया कश्मीरी पंडितों के साथ हुई बर्बरता आपके मन को व्यथा और वेदना से भर देगा |  

इस फिल्म का निर्देशन विवेक अग्निहोत्री ने किया है |इसे अभिषेक अग्रवाल आर्ट्स के प्रोडक्शन हाउस द्वारा बनाया गया है |

यह फिल्म इस साल २६ जनवरी के दिन रिलीज़ होने वाली थी, किन्तु कोरोना के बढ़ते केस के चलते यह फिल्म की रिलीज़ डेट को आगे बढ़ाना पड़ा |

इस film के रिलीज़ होने के बाद इसे कई राज्यों की  सरकारों ने टैक्स फ्री भी कर दिया है , फिल्म सिनामघरों में जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है |

कश्मीरी पंडितों पर लिखी गई किताब (Books written on Kashmiri Pandits)

कश्मीरी पंडितों  के ऊपर हुवे जुल्म की दास्ताँ कई लेखकों ने अपने किताब में बयाँ की है |इन पर लिखी गई कुछ किताबों के नाम इस प्रकार हैं,

“आवर मून हेज ब्लड क्लॉट्स” (Our moon has blood clots) – ये किताब राहुल पंडिता ने लिखा है, जो कि खुद एक कश्मीरी पंडित है. इन्होंने अपनी इस किताब में अपने परिवार की कहानी के माध्यम से कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचारों की कहानी बताई है.

 ‘कल्चर एंड पोलिटिकल हिस्ट्री ऑफ़ कश्मीर’ (Cultural and Political history of Kashmir)– इस किताब में भी कश्मीरी पंडितों के बारे में बताया गया है. ये किताब पीएनके बामजई ने लिखा है और उन्होंने भी कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अन्यायों की जिक्र अपनी इस किताब में किया है.

‘माय फ्रोजेन टरबुलेन्स इन कश्मीर’ (My Frozen tarbulance in Kashmir) – ये किताब जगमोहन द्वारा लिखी गई है. इस किताब में साल 1990 की घटनाओं का है और कैसे आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडितों को उनके घरों को छोड़ने पर मजबूर कर दिया था.

FAQ (प्रश्न – उत्तर)

कश्मीर के मूल निवासी कौन हैं?

कश्मीरी पंडित कश्मीर के मूल निवासी माने जाते हैं |

कश्मीरी पंडितों पर कौन सी फिल्म बनी है ?

कश्मीर फाइल्स

कश्मीरी पंडित के साथ क्या हुआ था ?

उनकी हत्या की जा रही थी, जिसके कारण उन्हें वहां से पलायन करना पड़ा था.

कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के समय कश्मीर में किसकी सरकार थी |

राज्य में फारूख अब्दुल्ला की , केंद्र में वी पी सिंह की |

Leave a Comment

Buy grocery online huge discount Best Summer clothes for women online Business Idea Gulkhaira Farming: 10,000 रुपये क्विंटल बिकता है यह पौधा, करें खेती होगी जबरदस्त कमाई IPL news: Jos Buttler और chehel की बदोलत राजस्थान ने KKR को हराया Mother’s Day: मदर्स दे कोट्स हिंदी में | Mothers Day Quotes in Hindi
Buy grocery online huge discount Best Summer clothes for women online Business Idea Gulkhaira Farming: 10,000 रुपये क्विंटल बिकता है यह पौधा, करें खेती होगी जबरदस्त कमाई IPL news: Jos Buttler और chehel की बदोलत राजस्थान ने KKR को हराया Mother’s Day: मदर्स दे कोट्स हिंदी में | Mothers Day Quotes in Hindi